दो यूट्यूबरों पर एफआईआर,नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने का मामला, पुलिस ने शुरू की जांच
हिमांशु रैकवार दमोह
दमोह। सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने और अधिक व्यूज़ बटोरने की होड़ अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गई है। दमोह जिले के पथरिया थाना क्षेत्र में एक दुष्कर्म प्रकरण से जुड़ी नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के आरोप में दो यूट्यूबरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, यूट्यूबर पुष्पेंद्र सिंह लोधी घूसस और पुष्पेंद्र सिंह लोधी चंडी चौपरा ने एक चर्चित दुष्कर्म प्रकरण को लेकर फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव प्रसारण किया था। इस दौरान दोनों ने न केवल पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों के साक्षात्कार लिए, बल्कि बहस के दौरान ऐसी जानकारियां भी सार्वजनिक कर दीं, जिन्हें कानूनन गोपनीय रखा जाना आवश्यक था।
आरोप है कि लाइव वीडियो में नाबालिग पीड़िता का नाम, निवास स्थान तथा गर्भवती होकर बच्चे को जन्म देने संबंधी जानकारी सार्वजनिक कर दी गई। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिससे पीड़िता और उसके परिवार की निजता भंग हुई तथा सामाजिक बदनामी का सामना करना पड़ा।
कानून का उल्लंघन माना गया कृत्य
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी नाबालिग यौन अपराध पीड़ित की पहचान उजागर करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में पीड़ित की पहचान, पता, फोटो या अन्य व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। इसका उद्देश्य पीड़ित के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की रक्षा करना होता है।
पुलिस जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर पथरिया थाना में दोनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 72(1), 3(5) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 23(4) एवं किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 74 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
क्षेत्र में आक्रोश
मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए संवेदनशील मामलों में कानून और नैतिकता की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने से उसके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पुलिस का संदेश
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी यौन अपराध, विशेषकर नाबालिगों से जुड़े मामलों में पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करना गंभीर अपराध है। सोशल मीडिया संचालकों, यूट्यूबरों और डिजिटल कंटेंट निर्माताओं को कानून का पालन करते हुए संवेदनशील मामलों में जिम्मेदारी और सावधानी बरतनी चाहिए।
फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और वीडियो प्रसारण से जुड़े अन्य तथ्यों को भी खंगाला जा रहा है। यदि जांच में अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं तो अन्य कानूनी धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।