हाईकोर्ट से बड़ी राहत: अवैध कॉलोनी मामले में एफआईआर दर्ज करने के कलेक्टर के आदेश पर रोक

     अधिवक्ता अभिषेक दुबे मध्यप्रदेश हाइकोर्ट

हाईकोर्ट से बड़ी राहत: अवैध कॉलोनी मामले में एफआईआर दर्ज करने के कलेक्टर के आदेश पर रोक
हिमांशु रैकवार 
जबलपुर/पन्ना। अवैध कॉलोनी निर्माण के एक चर्चित मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण अंतरिम राहत देते हुए पन्ना कलेक्टर द्वारा एफआईआर दर्ज कराने संबंधी आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी है। न्यायालय के इस आदेश के बाद मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर फिलहाल विराम लग गया है।
जानकारी के अनुसार पन्ना जिले में कथित अवैध कॉलोनी निर्माण के मामले में कलेक्टर द्वारा 25 मई 2026 को जारी आदेश में संबंधित भूमि स्वामी के विरुद्ध अपराध दर्ज कराने तथा संपत्ति पर कब्जा लेने के निर्देश दिए गए थे। उक्त आदेश को चुनौती देते हुए प्रभावित पक्ष ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता ने रखी अपनी दलील

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक दुबे ने न्यायालय को बताया कि संबंधित भूमि का विक्रय व्यक्तिगत एवं आर्थिक आवश्यकताओं के कारण किया गया था। साथ ही यह भी तर्क रखा गया कि कारण बताओ नोटिस पर प्रस्तुत जवाब का समुचित परीक्षण किए बिना कलेक्टर ने मध्यप्रदेश नगरपालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 339(डी) के तहत कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराने और संपत्ति पर कब्जा लेने के निर्देश जारी कर दिए।

हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मनींदर एस. भट्टी की एकलपीठ ने राज्य शासन सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को सात कार्य दिवस के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा करने का निर्देश दिया है तथा मामले को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने के आदेश दिए हैं।

एफआईआर संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक
हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट कहा है कि अगली सुनवाई तक 25 मई 2026 के उस आदेश का प्रभाव और संचालन, जो याचिकाकर्ता के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने से संबंधित है, स्थगित रहेगा। अर्थात संबंधित आदेश के आधार पर फिलहाल एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।

कॉलोनी विकास नियमों की व्याख्या भी बनी बहस का विषय

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने मध्यप्रदेश नगरपालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 के नियम-22 का भी हवाला दिया। तर्क दिया गया कि नियमों के तहत अवैध कॉलोनी संबंधी कार्रवाई की प्रक्रिया निर्धारित है और कलेक्टर द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर न्यायिक परीक्षण आवश्यक है।

मामले पर सबकी नजर

पन्ना जिले में अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध चल रही प्रशासनिक कार्रवाई के बीच हाईकोर्ट का यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अंतिम निर्णय आने तक यह मामला कॉलोनी विकास नियमों, प्रशासनिक अधिकारों और भूमि स्वामियों के अधिकारों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

फिलहाल हाईकोर्ट ने राज्य शासन से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई तक एफआईआर संबंधी आदेश पर रोक बरकरार रखी है।
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