रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर जनजातीय समाज ने उठाई अधिकारों और सम्मान की आवाज, मुख्यमंत्री के नाम सौंपे तीन अहम ज्ञापन
हिमांशु रैकवार बुंदेली संवाद
कुम्हारी (पटेरा), दमोह। वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती के 462वें बलिदान दिवस पर बुधवार को पटेरा विकासखंड के ग्राम कुम्हारी में आयोजित विशाल सामाजिक सम्मेलन जनजातीय समाज के अधिकारों, सम्मान और विकास से जुड़ी मांगों का बड़ा मंच बन गया। कार्यक्रम में जनजातीय समाज, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय नागरिकों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के नाम तीन महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन तहसीलदार पटेरा एवं जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि गौरव पटेल को सौंपे गए।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि महारानी रानी दुर्गावती का बलिदान केवल इतिहास का गौरव नहीं है, बल्कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, स्वाभिमान और अपने अधिकारों की रक्षा का प्रेरणास्रोत भी है। इसी भावना के साथ समाज ने आदिवासी हितों, ऐतिहासिक विरासत और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगों को शासन के समक्ष रखा।
पहले ज्ञापन में मांग की गई कि दमोह जिला कलेक्ट्रेट परिसर, जो वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम से जाना जाता है, वहां जनसहयोग और सामाजिक सहभागिता से उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति प्रदान की जाए। समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि इससे जिले की ऐतिहासिक पहचान को मजबूती मिलेगी और नई पीढ़ी को प्रेरणा प्राप्त होगी।
दूसरे ज्ञापन में वनाधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग प्रमुखता से उठाई गई। समाज ने लंबित एवं निरस्त वनाधिकार दावों की पुनः सुनवाई, पात्र हितग्राहियों को शीघ्र वनाधिकार पट्टे प्रदान करने और आदिवासी एवं वनाश्रित परिवारों को बेदखली से संरक्षण देने की मांग की। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की स्वीकृति, नव-निर्मित मेडिकल कॉलेज का नामकरण अमर शहीद राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह के नाम पर करने तथा जिला स्तर पर आदिवासी सामुदायिक भवन निर्माण की मांग भी रखी गई।
तीसरे ज्ञापन में सागर जिले की केसली तहसील के ग्राम मंगेला निवासी आदिवासी युवक स्वर्गीय संजू गौड़ की संदिग्ध मृत्यु के मामले की उच्चस्तरीय एसआईटी जांच कराने की मांग की गई। ज्ञापन में मृतक की पत्नी तुलसा गौड़ की गिरफ्तारी की स्वतंत्र समीक्षा, वास्तविक आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी, दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल रही।
सम्मेलन में उपस्थित समाजजनों ने कहा कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, ऐतिहासिक महापुरुषों का सम्मान और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।
कार्यक्रम के अंत में वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती के बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए शिक्षा, संगठन, सामाजिक एकता और अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया। सम्मेलन में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि गौरव पटेल, जिला पंचायत सदस्य साहिल सिंह लोधी, बबीता सिंह पोर्ते, कौशल सिंह पोर्ते, प्रकाश सिंह धुर्वे, लखन सिंह मरकाम, धीरज सिंह सरूता, जग्गन सिंह पहलवान, मुंशीलाल तेकाम, चंद्रभान सिंह तेकाम, अनरत सिंह एडाली, महेंद्र सिंह मरकाम, पूजा मरावी सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।