कलेक्टर के औचक निरीक्षण के बाद डायमंड सीमेंट पर श्रम विभाग का शिकंजासुरक्षा उपकरण नहीं, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान नहीं, रेस्ट रूम भी नहीं; 7 दिन में मांगा जवाब



कलेक्टर के औचक निरीक्षण के बाद डायमंड सीमेंट पर श्रम विभाग का शिकंजा

सुरक्षा उपकरण नहीं, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान नहीं, रेस्ट रूम भी नहीं; 7 दिन में मांगा जवाब

हिमांशु रैकवार दमोह 
दमोह। जिले के नरसिंहगढ़ स्थित डायमंड सीमेंट (हेडेलबर्ग सीमेंट इंडिया लिमिटेड) में श्रम कानूनों के उल्लंघन के मामले में श्रम विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई कुछ दिन पहले कलेक्टर दमोह द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के बाद शुरू हुई जांच का परिणाम है। निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर कलेक्टर ने जांच कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जिसके बाद श्रम विभाग ने फैक्ट्री का विस्तृत निरीक्षण कर नोटिस जारी किया।
जानकारी के अनुसार कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निर्देश पर 16 जून 2026 को सहायक श्रम पदाधिकारी एवं श्रम निरीक्षक द्वारा फैक्ट्री का औचक निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान श्रमिकों के बयान लिए गए और कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद श्रमायुक्त, मध्यप्रदेश के निर्देश पर उपसंचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, श्रम विभाग सागर संभाग द्वारा 20 जून 2026 को फैक्ट्री का विस्तृत निरीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को फैक्ट्री अधिभोगी एवं प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने फैक्ट्री प्रबंधन, एचआर अधिकारियों और श्रमिकों से चर्चा की तथा आवश्यक दस्तावेजों की जांच की। श्रमिकों के बयानों के आधार पर तीन प्रमुख अनियमितताएं सामने आईं।

श्रमिकों को नहीं मिले सुरक्षा उपकरण

जांच में पाया गया कि फैक्ट्री में कार्यरत श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण जैसे सेफ्टी हेलमेट, सेफ्टी शूज, दस्ताने, गॉगल्स और जैकेट उपलब्ध नहीं कराए गए। कई श्रमिकों ने अपने बयान में बताया कि उन्हें अपनी सुरक्षा सामग्री स्वयं खरीदकर काम करना पड़ता है। इसे फैक्ट्री अधिनियम, 1948 की धारा 41 तथा नियम 73(1) का उल्लंघन माना गया है।

ओवरटाइम कराया, लेकिन दोगुना भुगतान नहीं

श्रमिकों के बयानों के अनुसार उनसे ओवरटाइम कार्य कराया गया, लेकिन नियमानुसार दोगुना वेतन नहीं दिया गया। इसे फैक्ट्री अधिनियम, 1948 की धारा 59 का उल्लंघन माना गया है।

रेस्ट रूम और लंच रूम की व्यवस्था नहीं

निरीक्षण में यह भी पाया गया कि फैक्ट्री में सभी श्रमिकों के लिए रेस्ट रूम एवं लंच रूम की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। यह फैक्ट्री अधिनियम, 1948 की धारा 47 का उल्लंघन है।

20 से 22 दिन तक लगाए गए दैनिक वेतनभोगी श्रमिक

जांच में सामने आया कि ठेकेदारों के माध्यम से प्रीहीटर क्षेत्र में प्लांट शटडाउन, साफ-सफाई एवं मेंटेनेंस कार्य के लिए दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों को 20 से 22 दिनों तक नियोजित किया गया था। इन श्रमिकों के बयान भी जांच के दौरान दर्ज किए गए।

7 दिन में जवाब देने के निर्देश

श्रम विभाग ने फैक्ट्री अधिभोगी एवं प्रबंधक को सात दिन के भीतर कारण बताओ नोटिस का जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो फैक्ट्री अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या है मामला

- कलेक्टर दमोह ने 16 जून को फैक्ट्री का औचक निरीक्षण कराया।
- निरीक्षण में श्रम कानूनों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आईं।
- कलेक्टर के निर्देश पर श्रम विभाग ने विस्तृत जांच की।
- 20 जून को उपसंचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा ने फैक्ट्री का निरीक्षण किया।
- जांच रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
- प्रबंधन से सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।

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