कलेक्टर का मायसेम सीमेंट फैक्ट्री पर छापा: श्रमिकों से 8 घंटे से ज्यादा काम, ओवरटाइम नहीं; सुरक्षा उपकरण भी नहीं मिले
श्रमिकों के बयान दर्ज, प्रबंधन पर केस दर्ज करने और सख्त कार्रवाई के निर्देश
दुर्घटना में 6 दांत टूटने पर भी नहीं कराया इलाज, कलेक्टर ने जताई नाराजगी
हिमांशु रैकवार दमोह
दमोह। जिले के नरसिंहगढ़ स्थित हेडलबर्ग सीमेंट (मायसेम सीमेंट) फैक्ट्री में श्रमिकों के अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों के बीच मंगलवार को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान श्रमिकों से सीधे बातचीत में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद कलेक्टर ने संबंधित प्रबंधन के खिलाफ केस दर्ज कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर के निरीक्षण में सामने आया कि फैक्ट्री में श्रमिकों को शासन द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार मजदूरी नहीं दी जा रही है। कई श्रमिकों ने बताया कि उनसे निर्धारित 8 घंटे से अधिक काम कराया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। इतना ही नहीं, वेतन भी एकमुश्त देने के बजाय किस्तों में दिया जा रहा है और उसमें कटौती की शिकायतें भी सामने आई हैं।
सुरक्षा के नाम पर बड़ी लापरवाही
निरीक्षण के दौरान श्रमिकों ने बताया कि उन्हें हेलमेट, सुरक्षा जूते, सुरक्षा चश्मे सहित आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते। मजबूरी में उन्हें ये सामग्री अपने खर्च पर खरीदनी पड़ती है। फैक्ट्री में श्रमिकों को वेतन पर्ची तक नहीं दी जा रही है और भोजन के लिए उचित स्थान की व्यवस्था भी नहीं है।
कलेक्टर ने इसे श्रम कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए श्रम विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
कार्यस्थल दुर्घटना में घायल श्रमिक का नहीं कराया इलाज
निरीक्षण के दौरान एक श्रमिक ने कलेक्टर को बताया कि कार्य के दौरान हुई दुर्घटना में उसके छह दांत टूट गए थे, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने उसके उपचार की कोई व्यवस्था नहीं की। इस पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं में श्रमिक का उपचार कराना कंपनी की जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
वाहन चोरी और पेट्रोल चोरी की शिकायतें भी सामने आईं
फैक्ट्री में कार्यरत श्रमिकों ने अपने वाहनों की सुरक्षा को लेकर भी शिकायत की। श्रमिकों ने बताया कि परिसर में वाहन चोरी और पेट्रोल चोरी की घटनाएं होती हैं। इस पर कलेक्टर ने फैक्ट्री प्रबंधन को श्रमिकों के वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री परिसर में श्रम कानूनों के तहत लगाए जाने वाले अनिवार्य सूचना बोर्ड भी नहीं मिले। इस पर कलेक्टर ने श्रम विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए नियमित निरीक्षण और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने के निर्देश
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि शासन की मंशा स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है। तकनीकी कार्यों में विशेषज्ञ श्रमिकों की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन जहां संभव हो वहां स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कलेक्टर बोले- हर श्रमिक को मिलेगा उसका अधिकार
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि जिला प्रशासन श्रमिकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। प्रत्येक श्रमिक को उसका वैधानिक अधिकार दिलाया जाएगा तथा फैक्ट्री परिसर में श्रम कानूनों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। निरीक्षण के दौरान एसडीएम पथरिया निकेत चौरसिया, तहसीलदार वृंदेश पांडे और श्रम विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।