रीवा हादसे पर जैन समाज में उबाल
बांदकपुर में प्रतिष्ठान बंद, मौन पदयात्रा निकाल सौंपा ज्ञापन
“राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाने की उठी मांग, रीवा हादसे की SIT जांच की मांग
हिमांशु रैकवार बांदकपुर (दमोह). रीवा जिले में 20 मई को पद विहार के दौरान सड़क दुर्घटना में जैन संत 105 श्रुतमति माताजी एवं 105 उपशममति माताजी की असामयिक समाधि के बाद दिगंबर जैन समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय जैन संघ के आह्वान पर बांदकपुर धाम में जैन समाज ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर विरोध जताया और जैन मंदिर से मौन पदयात्रा निकाली।
हाथों में बैनर और श्रद्धांजलि संदेश लिए समाजजन शांतिपूर्वक नगर भ्रमण करते हुए बांदकपुर पुलिस चौकी पहुंचे। यहां तहसीलदार प्रीतम सिंह लोधी, हिंडोरिया थाना प्रभारी धर्मेंद्र उपाध्याय एवं बांदकपुर पुलिस चौकी प्रभारी राजेंद्र मिश्रा को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में समाज ने रीवा हादसे की SIT अथवा न्यायिक जांच कराने, पद विहार करने वाले साधु-संतों के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने तथा केंद्र सरकार द्वारा “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाए जाने की मांग की। साथ ही संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखने और प्रशासन व समाज के बीच समन्वय तंत्र विकसित करने की भी मांग उठाई गई।
दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष सुनील डबुल्या ने कहा कि जैन समाज अहिंसा और संयम का मार्ग अपनाने वाला समाज है, लेकिन लगातार हो रही घटनाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि पैदल विहार करने वाले साधु-संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और रीवा हादसे के दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
मौन पदयात्रा और ज्ञापन कार्यक्रम में शरद डबुल्या, प्रदीप डबुल्या, अनुज सिंघाई, प्रकाश जैन, श्रीपाल जैन, उदय चंद, नीरज जैन, विवेक जैन, लालू जैन, निपुण जैन, शरन जैन, दिनेश जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन शामिल रहे। महिला वर्ग से सुनीता डबुल्या, लीना जैन, सुलेखा, पूनम, नीलम, अर्चना, प्रभारानी, भाषिका और कोपल सहित अन्य महिलाएं भी उपस्थित रहीं।
जैन समाज का कहना है कि रीवा की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि संत सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है, जिसने पूरे देश के जैन समाज को झकझोर दिया है।