दमोह में अफसरशाही पर गंभीर आरोप: सरकारी कर्मचारियों से घर पर काम कराने का फरमान,मामला गरमाया


दमोह में अफसरशाही पर गंभीर आरोप: सरकारी कर्मचारियों से घर पर काम कराने का फरमान,मामला गरमाया

हिमांशु रैकवार दमोह।
जिले में अफसरशाही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। म.प्र. शासकीय लिपिकीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय संरक्षक राकेश सिंह हजारी ने जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि शासकीय कर्मचारियों से निजी काम कराए जा रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने शासन से मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

हजारी के अनुसार जल संसाधन विभाग दमोह के कार्यपालन यंत्री द्वारा कार्यालयीन आदेश क्रमांक 565 दिनांक 7 अप्रैल 2026 जारी कर 9 कर्मचारियों की ड्यूटी शासकीय निवास पर लगा दी गई। उनका कहना है कि किसी भी शासकीय कर्मचारी को अधिकारी के निजी निवास पर कार्य के लिए लगाना नियमों के विरुद्ध है और यह सीधे तौर पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शासकीय पद और कर्मचारियों का उपयोग निजी स्वार्थ या व्यक्तिगत कार्यों के लिए करना गंभीर कदाचार और अनैतिकता की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान है।

राकेश सिंह हजारी ने कहा कि अगर कर्मचारियों से निजी काम कराया जा रहा है तो इसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों, सामान्य प्रशासन विभाग या मध्यप्रदेश लोकायुक्त तक भी की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थाई शासकीय कर्मचारियों का कर्तव्य केवल उन्हें सौंपे गए शासकीय कार्यों का निर्वहन करना है, न कि किसी अधिकारी के निजी कार्य करना।

उन्होंने इस पूरे मामले को कर्मचारियों के अधिकारों और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए प्रदेश सरकार से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

संघ का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे आदेशों पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में भी कुछ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर कर्मचारियों को निजी कामों में लगाने की कोशिश कर सकते हैं।
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