दमोह में शिक्षकों का हुंकार भरा प्रदर्शन: कलेक्टर कार्यालय के सामने गूंजे नारे, टीईटी और पेंशन मुद्दे पर सरकार से निर्णायक लड़ाई का ऐलान


दमोह में शिक्षकों का हुंकार भरा प्रदर्शन: कलेक्टर कार्यालय के सामने गूंजे नारे, टीईटी और पेंशन मुद्दे पर सरकार से निर्णायक लड़ाई का ऐलान

हिमांशु रैकवार दमोह

बुधवार को दमोह में अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शिक्षकों का आक्रोश सड़कों पर खुलकर दिखाई दिया। सुबह करीब 11 बजे से कलेक्टर परिसर के सामने सैकड़ों की संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं और महिला अध्यापक एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी गरमाया रहा और शिक्षकों ने साफ शब्दों में कहा कि अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
धरना प्रदर्शन के बाद अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन एडीएम श्रीमती मीना मसराम को सौंपा। ज्ञापन में दो प्रमुख मांगों को प्रमुखता से रखा गया।

पहली मांग में कहा गया कि टीईटी परीक्षा मामले में मध्यप्रदेश सरकार अध्यापक-शिक्षक संवर्ग के हित में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करे, ताकि हजारों शिक्षकों के भविष्य पर मंडरा रहा संकट समाप्त हो सके।

दूसरी महत्वपूर्ण मांग में शिक्षकों ने कहा कि पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण जैसे लाभों में उनकी सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए, जिससे उन्हें पूर्ण सेवा का लाभ मिल सके।

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिला शिक्षकों की मौजूदगी ने आंदोलन को और मजबूत बना दिया। महिलाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार से न्याय की मांग की और कहा कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।

इस दौरान मंच से वक्ताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले समय में प्रदेश-भर में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

कार्यक्रम में मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त शिक्षक संघों के जिला अध्यक्ष, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में अपनी मांगों को दोहराया।
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