आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को हटाकर राज्यसभा में अशोक मित्तल को बनाया डिप्टी लीडर


नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) ने संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में अपने नेतृत्व ढांचे में एक चौंकाने वाला बदलाव किया है। पार्टी ने अपने फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उप-नेता (Deputy Leader) के पद से हटा दिया है। उनकी जगह पंजाब से सांसद और जाने-माने शिक्षाविद डॉ. अशोक मित्तल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राज्यसभा सचिवालय को भेजा गया पत्र

आम आदमी पार्टी ने इस फेरबदल के संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेजकर सूचित कर दिया है। अब से डॉ. अशोक मित्तल सदन में पार्टी के उप-नेता होंगे, जबकि संजय सिंह राज्यसभा में पार्टी के नेता के पद पर बने रहेंगे। पार्टी ने पत्र में एक और सख्त अनुरोध किया है कि राघव चड्ढा को अब राज्यसभा में पार्टी के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। यह कदम पार्टी की संसदीय रणनीति में किसी बड़े बदलाव या अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा कर रहा है।

कौन हैं डॉ. अशोक मित्तल?

पंजाब से राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक मित्तल देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों में गिने जाते हैं। वे मशहूर 'लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी' (LPU) के चांसलर भी हैं। उनकी नियुक्ति को पार्टी द्वारा पंजाब के प्रतिनिधित्व को और मजबूत करने और एक अनुभवी चेहरे को आगे लाने के रूप में देखा जा रहा है।

राघव चड्ढा और पार्टी के बीच 'सब ठीक नहीं'?

राघव चड्ढा, जो 2012 के लोकपाल आंदोलन के समय से ही अरविंद केजरीवाल के करीबी रहे हैं, उनकी पार्टी से बढ़ती दूरियों की अटकलें अब तेज हो गई हैं। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:

स्टार प्रचारकों से बाहर: हाल ही में असम चुनाव के लिए जारी स्टार प्रचारकों की सूची से भी राघव का नाम नदारद था।

अरविंद केजरीवाल से दूरी: हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद न तो उन्होंने केजरीवाल से मुलाकात की और न ही सोशल मीडिया पर कोई सक्रिय प्रतिक्रिया दी।

बदलते मुद्दे: पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पितृत्व अवकाश (Paternity Leave), हवाई अड्डों पर महंगा खाना और गिग वर्कर्स के अधिकारों जैसे सामाजिक मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे।

राज्यसभा में AAP की ताकत

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सदस्य हैं, जिनमें से 7 पंजाब और 3 दिल्ली से हैं। संख्या बल के हिसाब से AAP सदन में बीजेपी, कांग्रेस और टीएमसी के बाद चौथी सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में नेतृत्व में यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है। 

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