दमोह जिले के पहले राहवीर बने दो भाई,घायल की जान बचाने पर मिला 25 हजार का सम्मान


दमोह जिले के पहले राहवीर बने दो भाई,घायल की जान बचाने पर मिला 25 हजार का सम्मान
हिमांशु रैकवार दमोह
गोल्डन आवर में घायलों को अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान, योगेश और रत्नेश सुमन को कलेक्टर ने किया सम्मानित

दमोह- सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय रहते अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में मदद करने वाले दो सगे भाई अब दमोह जिले के पहले राहवीर (Good Samaritan) बन गए हैं। ग्राम इमलाई निवासी योगेश सुमन और रत्नेश सुमन को उनकी मानवीय पहल के लिए शासन की ओर से 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
कलेक्ट्रेट सभागार में मंगलवार को आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक के दौरान जिला कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने दोनों भाइयों को सम्मानित किया। जिला प्रशासन द्वारा दोनों के प्रकरण को स्वीकृति के लिए परिवहन आयुक्त, मध्यप्रदेश शासन भोपाल को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति मिलने के बाद यह सम्मान प्रदान किया गया।

दुर्घटना के बाद बिना देर किए पहुंचाया अस्पताल

मामला 12 अक्टूबर 2025 का है। दोपहर करीब 12:30 बजे योगेश सुमन ने परसोरिया पेट्रोल पंप के आगे मुख्य मार्ग पर एक सड़क दुर्घटना देखी। एक चार पहिया वाहन ने बाइक सवार ग्राम जोरतला, पथरिया निवासी भारत प्रजापति और विजय लोधी को टक्कर मार दी थी।

हादसे के बाद दोनों घायल सड़क पर पड़े हुए थे। स्थिति को देखते हुए योगेश सुमन ने तत्काल अपने भाई रत्नेश सुमन के साथ मिलकर दोनों घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार किया गया।

समय रहते अस्पताल पहुंचाए जाने से दोनों घायलों को आवश्यक चिकित्सा सहायता मिल सकी और उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ।

मानवता की मिसाल बनी दोनों भाइयों की पहल

सड़क हादसे के बाद अक्सर लोग मदद करने से बचते हैं, लेकिन योगेश और रत्नेश सुमन ने बिना किसी देरी के घायलों की मदद करने का फैसला लिया। उनकी इसी तत्परता को राहवीर योजना के तहत मानवीय योगदान के रूप में मान्यता दी गई।

जिला परिवहन अधिकारी के अनुसार, दोनों भाइयों द्वारा किए गए इस कार्य का प्रस्ताव जिला प्रशासन की ओर से परिवहन आयुक्त मध्यप्रदेश शासन को भेजा गया था। स्वीकृति मिलने के बाद दोनों को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

दमोह के पहले राहवीर बनने का गौरव

योगेश सुमन और रत्नेश सुमन की इस पहल ने न केवल दो घायल व्यक्तियों को समय पर उपचार दिलाने में मदद की, बल्कि उन्हें दमोह जिले के राहवीर योजना के तहत सम्मानित होने वाले पहले राहवीर बनने का गौरव भी दिलाया।

उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सड़क दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति की मदद के लिए आगे आने और उसे समय पर अस्पताल पहुंचाने से किसी की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।

एक छोटी-सी मदद, किसी की जिंदगी बचा सकती है

योगेश और रत्नेश सुमन को मिला यह सम्मान उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो सड़क हादसे के बाद घायल व्यक्ति की मदद करने से झिझकते हैं। दोनों भाइयों ने यह साबित किया कि सही समय पर उठाया गया एक कदम किसी की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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