महर्षि अरविंद जयंती पर ‘महर्षि अरविंद एवं भारत का विमर्श’ विषयक व्याख्यानमाला आयोजित
हिमांशु रैकवार बुंदेली संवाद
दमोह। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा महर्षि अरविंद जयंती के उपलक्ष्य में “महर्षि अरविंद एवं भारत का विमर्श” विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि के रूप में मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के राज्य सलाहकार श्री शिवनारायण पटेल उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. हृदय शाह जूदेव, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार श्री नरेंद्र दुबे तथा श्री दीपक तिवारी, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, दमोह उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि अरविंद एवं भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अतिथियों ने महर्षि अरविंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके विचारों को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया।
मुख्य अतिथि एवं वक्ता श्री शिवनारायण पटेल ने अपने उद्बोधन में महर्षि अरविंद के जीवन, उनके राष्ट्रवादी चिंतन तथा वर्तमान समय में चल रहे विभिन्न विमर्शों के संदर्भ में विस्तृत विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि महर्षि अरविंद ने भारत के राष्ट्रवाद को सनातन धर्म का स्वरूप माना और राष्ट्र निर्माण को आध्यात्मिक आधार प्रदान किया।
उन्होंने महर्षि अरविंद के ऐतिहासिक ‘उत्तरपाड़ा भाषण’ का उल्लेख करते हुए बताया कि 30 मई 1909 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के उत्तरपाड़ा में दिया गया यह भाषण भारत के आध्यात्मिक एवं राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अलीपुर बम कांड में एक वर्ष का कारावास भोगने के पश्चात यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था, जिसमें उन्होंने अपने आध्यात्मिक अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि जेल में उन्हें प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक वस्तु में वासुदेव के दर्शन हुए, जिसने उनके जीवन की दिशा को क्रांतिकारी से महायोगी की ओर परिवर्तित कर दिया।
श्री पटेल ने कहा कि महर्षि अरविंद के अनुसार “राष्ट्रवाद ही सनातन धर्म है”। उनका मानना था कि सनातन धर्म की उन्नति के साथ ही भारत का उत्थान संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की स्वतंत्रता केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका उद्देश्य संपूर्ण मानवता को आध्यात्मिक प्रकाश प्रदान करना और विश्व का मार्गदर्शन करना है।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने भी महर्षि अरविंद के राष्ट्रवादी, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चिंतन पर अपने विचार व्यक्त किए। व्याख्यानमाला में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यार्थी एवं नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम के साथ किया गया।