ट्रांसफर रुकवाने के लिए AI का सहारा प्रभारी मंत्री के नाम से बनाया फर्जी पत्र, कलेक्टर ने पकड़ी गलती; कर्मचारी निलंबित
टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कथित दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी ने अपना स्थानांतरण रुकवाने के लिए कथित तौर पर प्रभारी मंत्री के नाम से फर्जी पत्र तैयार कर विभाग में पेश कर दिया, लेकिन कलेक्टर की पैनी नजर ने पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया। मामले को गंभीर मानते हुए कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है, वहीं पुलिस जांच भी शुरू करा दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, गोर स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एमपीडब्ल्यू केएल बंशकार का तबादला दरगाएं स्वास्थ्य केंद्र कर दिया गया था। आरोप है कि तबादला रुकवाने के लिए कर्मचारी ने कथित तौर पर AI की मदद से प्रभारी मंत्री के नाम से एक पत्र तैयार किया। पत्र में स्थानांतरण आदेश निरस्त करने के निर्देश दर्शाए गए थे।
यह पत्र स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ डॉ. ओपी अनुरागी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पत्र को सही मानते हुए सीएमएचओ ने नोटशीट बनाकर मामला कलेक्टर विवेक श्रोतिय के पास भेज दिया। यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया।
कलेक्टर ने पत्र का अवलोकन करते समय प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर के नाम की वर्तनी में गलती देखी। इसी एक चूक ने पूरे दस्तावेज पर संदेह खड़ा कर दिया। जांच कराई गई तो पता चला कि मंत्री के नाम से जारी किया गया पत्र पूरी तरह फर्जी था।
बताया गया कि कर्मचारी का स्थानांतरण 7 जुलाई 2026 को हुआ था और उसी आदेश को रुकवाने के लिए यह कथित फर्जी पत्र तैयार कर विभाग में लगाया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने को कहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में कर्मचारी के अलावा कोई और भी शामिल था या नहीं।
अब पुलिस यह भी जांच करेगी कि फर्जी पत्र तैयार करने में वास्तव में AI का उपयोग किया गया था या नहीं, और यदि किया गया तो किस माध्यम से। जांच पूरी होने के बाद ही इस दावे की पुष्टि हो सकेगी।
यह मामला सरकारी तंत्र के लिए भी एक बड़ा सबक बनकर सामने आया है। डिजिटल तकनीक और AI के बढ़ते उपयोग के बीच सरकारी दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।